In short
- टाइम आउट के 7 जुलाई 2026 को जारी सर्वे में जयपुर दुनिया के सबसे ख़ुशहाल शहरों में छठे स्थान पर है और टॉप-20 में शामिल इकलौता भारतीय शहर है।
- रैंकिंग 150 शहरों के 24,000 से ज़्यादा स्थानीय लोगों के जवाबों पर बनी; संतुलन के लिए हर देश से सिर्फ़ एक शहर को अंतिम बीस में रखा गया।
- पहले तीन स्थान बाथ (ब्रिटेन), पनामा सिटी और ग्वाडलाहारा (मैक्सिको) को मिले; इसी साल टाइम आउट की संस्कृति सूची में भी जयपुर 18वें नंबर पर रहा।
राजस्थान की राजधानी के लिए यह हफ़्ता एक ख़ास ख़बर लेकर आया है। ब्रिटिश ट्रैवल और सिटी पत्रिका टाइम आउट ने 7 जुलाई को अपना सालाना "दुनिया के सबसे ख़ुशहाल शहर" सर्वे जारी किया, और इसमें जयपुर को दुनिया में छठा स्थान मिला है। सूची में शामिल बीस शहरों में जयपुर अकेला भारतीय शहर है, यानी ख़ुशहाली के इस पैमाने पर देश की नुमाइंदगी इस बार सिर्फ़ गुलाबी नगरी ने की है।
यह रैंकिंग इसलिए भी ख़ास है कि यह किसी संस्था के आर्थिक या प्रशासनिक आँकड़ों से नहीं निकली। टाइम आउट हर साल दुनिया भर के शहरों में रहने वाले लोगों से उनके अपने शहर के बारे में एक बड़ा सर्वे करता है, और इस बार 150 शहरों के 24,000 से ज़्यादा स्थानीय लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। यानी जयपुर की यह जगह बाहर बैठे विशेषज्ञों की राय नहीं, ख़ुद शहरवासियों के एहसास का नतीजा है।
पहले स्थान पर इंग्लैंड का ऐतिहासिक शहर बाथ रहा, जबकि दूसरे और तीसरे नंबर पर पनामा सिटी और मैक्सिको का ग्वाडलाहारा हैं। सूची को दुनिया भर में संतुलित रखने के लिए पत्रिका ने एक नियम रखा: हर देश से सिर्फ़ एक ही शहर अंतिम बीस में जगह पा सकता था। इस नियम के साथ भी शीर्ष दस में पहुँचना बताता है कि जयपुर के लोगों ने अपने शहर के बारे में कितने भरे मन से जवाब दिए।
कैसे तैयार हुई यह रैंकिंग
टाइम आउट ने हर शहर के स्थानीय लोगों के सामने पाँच सीधे कथन रखे और पूछा कि वे इनसे कितना सहमत हैं:
- मेरा शहर मुझे ख़ुश रखता है।
- जहाँ मैं पहले रहा हूँ या घूमा हूँ, उनके मुक़ाबले मैं अपने शहर में ज़्यादा ख़ुश महसूस करता हूँ।
- मेरे शहर के लोग सकारात्मक नज़र आते हैं।
- मेरा शहर रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जो अनुभव देता है, उनमें मुझे ख़ुशी मिलती है।
- हाल के समय में मेरे शहर की ख़ुशहाली काफ़ी बढ़ी है।
इन जवाबों में सकारात्मक प्रतिक्रियाओं का प्रतिशत निकालकर शहरों की रैंकिंग बनी। ध्यान देने की बात यह है कि यह लोगों की धारणा का सर्वे है, कोई वस्तुनिष्ठ सूचकांक नहीं; यह मापता है कि लोग अपने शहर में ख़ुद को कितना ख़ुश महसूस करते हैं, न कि सड़कों या अस्पतालों की गिनती।
पहले तीन पायदान पर कौन
नंबर एक पर रहे बाथ के आँकड़े बताते हैं कि वहाँ के लोग अपने शहर से कितने जुड़े हैं: 93 फ़ीसदी ने माना कि उनका शहर उन्हें ख़ुश रखता है, 92 फ़ीसदी ने कहा कि वे कहीं और के मुक़ाबले बाथ में ज़्यादा ख़ुश हैं, और 91 फ़ीसदी को रोज़मर्रा के अनुभवों में ख़ुशी मिलती है। रोमन दौर के स्नानघरों और जॉर्जियन वास्तुकला के लिए मशहूर यह शहर टाइम आउट की हरियाली वाली सूची में भी सबसे ऊपर रहा।
दूसरे स्थान पर पनामा सिटी रही, जहाँ 93 फ़ीसदी लोगों ने शहर को ख़ुशी देने वाला बताया; समुदाय से जुड़ाव के पैमाने पर यह शहर सर्वे के सभी शहरों में सबसे आगे रहा, जहाँ 87 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि यहाँ लोगों से जुड़ना आसान है। तीसरे नंबर पर मैक्सिको का ग्वाडलाहारा है, जिसका कुल ख़ुशहाली स्कोर 83 फ़ीसदी रहा और जिसकी संस्कृति और खान-पान को स्थानीय लोगों ने खुलकर सराहा।
दुनिया के 20 सबसे ख़ुशहाल शहर: पूरी सूची
- बाथ, ब्रिटेन
- पनामा सिटी, पनामा
- ग्वाडलाहारा, मैक्सिको
- मेडेयिन, कोलंबिया
- क्राको, पोलैंड
- जयपुर, भारत
- शिकागो, अमेरिका
- केप टाउन, दक्षिण अफ़्रीका
- शंघाई, चीन
- गोथेनबर्ग, स्वीडन
- मॉन्ट्रियल, कनाडा
- साओ पाउलो, ब्राज़ील
- वालेंसिया, स्पेन
- प्राग, चेक गणराज्य
- मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया
- कुआलालंपुर, मलेशिया
- हैम्बर्ग, जर्मनी
- पोर्तो, पुर्तगाल
- एम्स्टर्डम, नीदरलैंड
- चियांग माई, थाईलैंड
जयपुर के हिस्से यह जगह क्यों आई
सर्वे ख़ुशी की वजहें अलग से नहीं गिनाता, लेकिन जिन बातों पर लोगों से राय ली गई, वे जयपुर की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधी जुड़ती हैं: अपनापन, रोज़ के छोटे-छोटे अनुभवों की ख़ुशी, और अपने शहर पर गर्व। परकोटे के बाज़ारों की रौनक़, त्योहारों का साल भर चलने वाला सिलसिला, गलियों का खान-पान और मेहमाननवाज़ी वाला मिज़ाज; ये सब उसी एहसास का हिस्सा हैं जिसे इस सर्वे ने नापा है।
इसी साल टाइम आउट के एक दूसरे सर्वे ने इस तस्वीर को आँकड़ों में भी पकड़ा। पत्रिका की संस्कृति और कला वाली सूची के लिए हुए सर्वे में जयपुर के 77 फ़ीसदी स्थानीय लोगों ने शहर के सांस्कृतिक माहौल को अच्छा या शानदार बताया, 73 फ़ीसदी ने त्योहारों के माहौल को ख़ास तौर पर ऊँचे अंक दिए, और 69 फ़ीसदी ने माना कि यहाँ संस्कृति का आनंद जेब पर भारी नहीं पड़ता। जो शहर अपने ही लोगों की नज़र में इतना जीवंत हो, उसका ख़ुशहाली की सूची में चमकना हैरान नहीं करता।
इसी साल की दूसरी उपलब्धि: संस्कृति में 18वाँ स्थान
ख़ुशहाली वाली रैंकिंग जयपुर के लिए 2026 की अकेली वैश्विक पहचान नहीं है। टाइम आउट की दुनिया के 20 बेहतरीन संस्कृति-शहरों की सूची में भी जयपुर ने 18वाँ स्थान पाया, जहाँ पहला स्थान लंदन को मिला। पत्रिका ने जयपुर की तारीफ़ में लिखा कि यह उन दुर्लभ शहरों में है जहाँ विरासत को सहेजना आज भी फ़ैशन में है: आनोखी हैंड-प्रिंटिंग म्यूज़ियम और मीनाकारी हेरिटेज म्यूज़ियम जैसी जगहें सदियों पुरानी कारीगरी को नए दौर की भाषा में पेश कर रही हैं, पुरानी बावड़ियाँ लोक-संगीत और नृत्य के आयोजनों से फिर गुलज़ार हो रही हैं, और जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल से लेकर जयपुर आर्ट वीक तक आयोजनों का सिलसिला शहर को साल भर जगाए रखता है।
एक ही साल में एक ही प्रतिष्ठित पत्रिका की दो अलग-अलग वैश्विक सूचियों में जगह पाना बताता है कि यह कोई इत्तेफ़ाक़ नहीं; दुनिया की नज़र में जयपुर की छवि लगातार मज़बूत हो रही है।
"हैप्पी सिटी इंडेक्स" वाली ख़बरों से भ्रम न हों
इस ख़बर के साथ इंटरनेट पर एक भ्रम भी फैला है, इसलिए साफ़ कर देना ज़रूरी है। कई जगह इसी उपलब्धि को "हैप्पी सिटी इंडेक्स 2026" के हवाले से छापा गया है और लंदन को दुनिया का सबसे ख़ुशहाल शहर बताया गया है। हैप्पी सिटी इंडेक्स एक बिल्कुल अलग अध्ययन है, जिसे इंस्टिट्यूट फ़ॉर क्वालिटी ऑफ़ लाइफ़ नाम की संस्था जारी करती है; उसकी 2026 की सूची में पहला स्थान कोपेनहेगन को मिला है, लंदन 48वें नंबर पर है, और उस सूची में जयपुर शामिल ही नहीं है। जयपुर को छठा स्थान टाइम आउट के सर्वे में मिला है, जहाँ पहले नंबर पर बाथ है। ख़ुशी की बात दोनों ही सूरतों में जयपुर के पास है, लेकिन श्रेय सही अध्ययन को मिलना चाहिए।
पर्यटन और शहर की पहचान के लिए मायने
ऐसी सूचियाँ सिर्फ़ गर्व का विषय नहीं होतीं; ये दुनिया भर के यात्रियों की योजनाओं पर असर डालती हैं। जयपुर पहले से ही दिल्ली-आगरा-जयपुर वाले गोल्डन ट्रायंगल का सबसे चमकदार कोना है, और परकोटा शहर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। पर्यटन यहाँ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है: होटल, हस्तशिल्प, रत्न-आभूषण और गाइड से लेकर ऑटो चालक तक, लाखों परिवारों की रोज़ी इसी से जुड़ी है। जब कोई अंतरराष्ट्रीय पत्रिका दुनिया को बताती है कि इस शहर के अपने लोग ख़ुद को दुनिया में छठे नंबर का ख़ुशहाल मानते हैं, तो यह किसी भी विज्ञापन से बड़ा न्योता है।
गुलाबी नगरी: 1727 से आज तक
महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने 1727 में जिस योजनाबद्ध शहर की नींव रखी थी, वह आज भी अपने चौड़े रास्तों, चौपड़ों और तयशुदा बाज़ारों में उसी सोच को जीता है। हवा महल, आमेर, सिटी पैलेस और जंतर मंतर इसकी पहचान हैं, तो तीज-गणगौर से लेकर पतंगबाज़ी तक इसके त्योहार इसकी धड़कन। इस सर्वे ने बस उस बात पर दुनिया की मुहर लगाई है जो जयपुर वाले हमेशा से जानते हैं: इस शहर की असली दौलत इसकी इमारतें ही नहीं, इनके बीच हँसते-बसते लोग हैं।