रक्षाबंधन पर निःशुल्क बस यात्रा से रोडवेज बसों में महिलाओं की भारी भीड़

जयपुर, 9 अगस्त 2025 – रक्षाबंधन के परिपेक्ष्य में राजस्थान सरकार द्वारा घोषित एक विशेष पहल के परिणामस्वरूप, राज्य की सड़कों पर असाधारण प्रताप देखने को मिला। 9 और 10 अगस्त को राज्य की साधारण रोडवेज बसों (ordinary, express, sleeper, Blue Line आदि, गैर-एसी, नॉन-वोल्वो, और बिना “ऑल इंडिया परमिट” वाले) में महिलाओं को पूरी तरह नि:शुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की गई है।

विस्तार में योजना और लाभ

यह पहल पहली बार है जब रक्षाबंधन पर महिला यात्रियों को दो दिनों तक मुफ्त रोडवेज यात्रा का लाभ दिया गया है। इस निर्णय का ऐलान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने “आंगनवाड़ी बहन सम्मान” कार्यक्रम के दौरान किया, जिसमें उन्होंने 1.21 लाख से अधिक अंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को रक्षाबंधन उपहार के रूप में ₹501 का DBT भी हस्तांतरित किया।

यात्रा यह सुविधा केवल राजस्थान राज्य में संचालित रोडवेज बसों तक सीमित है – इंडिया परमिट या प्रीमियम AC/Volvo बसों में इसे लागू नहीं किया गया।

अनुमानित लाभार्थी और वित्तीय असर

परिवहन विभाग के अनुमान अनुसार, इस सुविधा से लगभग 8.5 लाख महिलाएं लाभान्वित होंगी; इस पर सरकार का खर्च लगभग ₹14 करोड़ आंका गया है।

भीड़भाड़ और परिचालन प्रबंधन

जैसलमेर (जिसका जनसंख्या घनत्व सबसे कम है) सहित कई जिलों में रोडवेज बसों में यात्रा करने वाली महिलाओं की संख्या क्षमता से अधिक रही – कुछ बसें 113% तक भरी रहीं। यह दर्शाता है कि व्यवस्था सलंग्न प्रदेशीय डिपो एवं परिचालन केंद्रों पर यात्रा की मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त बसें उपलब्ध कराई जा रही थीं।

सरकारी और प्रशासनिक संरचना

परिवहन विभाग और RSRTC ने यात्रियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने हेतु अग्रिम सेवा प्रबंधन सुनिश्चित किया।
राज्य सरकार, महिला कल्याण एवं पारिवारिक एकता को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से इस पहल को लागू कर रही है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी ₹501 DBT फंडरहित रूप में प्रदान किया गया और उनके सम्मान के लिए कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इस वर्ष रक्षाबंधन पर राजस्थान सरकार द्वारा महिलाओं को दी गई दो दिवसीय निशुल्क रोडवेज यात्रा की सुविधा सामाजिक समरसता और परिवारिक मेलजोल को बढ़ावा देने वाली कार्रवाई रही। यात्री-संख्या, परिवहन लागत, और संचालन समायोजन – इन सबका समन्वय रखते हुए यह योजना सफलतापूर्वक लागू की गई है। परिणामस्वरूप, लाखों बहनों को आर्थिक बाधा के बिना भाइयों से मिलने का अवसर मिला, जिससे त्योहार की गरिमा और संवेदना दोनों प्रबल हुई।

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