कर्नल सोनाराम का जैसलमेर के मोहनगढ़ में किसान समुदाय के बीच अंतिम संस्कार

जैसलमेर ज़िले के वरिष्ठ राजनीतिक और सामाजिक नेता कर्नल सोनाराम चौधरी का 20 अगस्त की रात 11 बजे अपोलो अस्पताल, दिल्ली में निधन हो गया। उनकी अंतिम यात्रा और संस्कार 22 अगस्त को उनके पैतृक स्थान श्री मोहनगढ़ में हजारों की भीड़ और किसान समुदाय की उपस्थिति में संपन्न हुए।

निधन की संक्षिप्त जानकारी

कर्नल सोनाराम लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। 20 अगस्त की रात उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर ने पूरे मारवाड़, खासकर जैसलमेर–बाड़मेर क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया।

अंतिम संस्कार का कार्यक्रम

21 अगस्त को उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से बाड़मेर लाया गया। उतरलाई एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में समर्थकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्थिव शरीर उनके बाड़मेर स्थित आवास पर रखा गया, जहाँ आमजन और कार्यकर्ताओं ने अंतिम दर्शन किए।

22 अगस्त को सुबह 11 बजे उनकी शवयात्रा मोहनगढ़ स्थित पैतृक स्थान से निकाली गई और किसान समुदाय की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

क्षेत्र में शोक की लहर

उनके निधन से पूरे पश्चिमी राजस्थान, विशेषकर किसान समाज में गहरा दुख व्याप्त हो गया। मोहनगढ़ और आसपास के गाँवों से हजारों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।

जीवन-परिचय

जन्म और शिक्षा

कर्नल सोनाराम चौधरी का जन्म वर्ष 1945 में जैसलमेर ज़िले के मोहनगढ़ क्षेत्र में हुआ था। वे पढ़ाई में हमेशा अग्रणी रहे और जोधपुर के MBM इंजीनियरिंग कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की।

सेना में योगदान

1966 में भारतीय सेना में भर्ती होकर उन्होंने देशसेवा का संकल्प लिया। 1971 के भारत–पाक युद्ध में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। सेना में लगभग तीन दशकों तक सेवा देने के बाद 1994 में कर्नल पद से सेवानिवृत्त हुए।

राजनीतिक सफर

  • कांग्रेस में प्रवेश (1994): सेवानिवृत्ति के बाद कांग्रेस में शामिल हुए और लगातार तीन बार बाड़मेर–जैसलमेर से सांसद चुने गए।
  • विधायक कार्यकाल: सांसद रहते हुए क्षेत्र के विकास कार्यों में विशेष योगदान दिया।
  • 2014 में बीजेपी में शामिल: उस वर्ष उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और सांसद का चुनाव जीता।
  • 2023 में कांग्रेस वापसी: राजनीतिक जीवन के अंतिम दौर में वे पुनः कांग्रेस में लौट आए।
People gathered for ex-MP/MLA Colonel Sonaram's last rituals
कर्नल सोना राम का अंतिम संस्कार, आमजन व राजनेता [मीडिया सौजन्य: उम्मेदा राम बेनीवाल फेसबुक के माध्यम से]

किसान समुदाय से जुड़ाव

कर्नल सोनाराम चौधरी को हमेशा किसान नेता के रूप में जाना गया। जाट किसान समाज में उनकी गहरी पकड़ थी। वे किसानों के मुद्दों को संसद और विधानसभा तक ले गए। अंतिम संस्कार भी इसी कारण किसान समुदाय की मौजूदगी में किया गया, जिसे प्रतीकात्मक रूप से उनकी जीवनभर की किसान राजनीति और समाज सेवा से जोड़ा जा रहा है।

अंतिम यात्रा और संस्कार का विवरण

दिल्ली से पार्थिव शरीर एयरलिफ्ट कर उतरलाई एयरपोर्ट लाया गया। वहाँ से बाड़मेर स्थित उनके निवास तक शवयात्रा निकाली गई। 21 अगस्त को आमजन दर्शन रखे गए, जहाँ भारी भीड़ उमड़ी।

22 अगस्त को सुबह 11 बजे मोहनगढ़ से अंतिम यात्रा शुरू हुई। शोकाकुल परिवार – श्रीमति विमला चौधरी (धर्मपत्नि), डॉ. रमन चौधरी (पुत्र), चेतनराम (बड़े भाई), अकलो देवी (बहिन), शिवदान (भतिज) एवं समस्त धीरौणी पाबड़ा परिवार, श्री मोहनगढ़ – सहित परिजनों, रिश्तेदारों और समर्थकों की मौजूदगी में उनका दाह संस्कार किया गया।

जनता और नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

  • स्थानीय जनता: हजारों किसानों और ग्रामीणों ने उन्हें “अपना नेता” कहते हुए भावभीनी विदाई दी।
  • राजनीतिक जगत: कांग्रेस और बीजेपी, दोनों दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया।
  • कांग्रेस नेताओं ने उन्हें “किसान समाज की आवाज़” बताया।
  • बीजेपी नेताओं ने भी उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने क्षेत्र का मान बढ़ाया।
  • सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि: ट्विटर, फेसबुक और व्हाट्सएप समूहों पर हजारों लोगों ने श्रद्धांजलि संदेश साझा किए।
Colonel Sona Ram Choudhary (कर्नल सोनाराम चौधरी)
Colonel Sona Ram Choudhary’s Last Rites (कर्नल सोनाराम चौधरी की अंतिम यात्रा) [Media Courtesy: File Photo]

कर्नल सोनाराम चौधरी ने सेना, राजनीति और किसान समाज – तीनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। एक सैनिक, जनप्रतिनिधि और किसान नेता के रूप में उन्होंने जो छाप छोड़ी है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी रहेगी। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि ईमानदारी, सेवा और समाज के प्रति समर्पण से ही सच्चा नेतृत्व जन्म लेता है।

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