पूर्व शिव विधायक अमीन खान फिर से कांग्रेस में शामिल हुए, उम्मेदाराम बेनीवाल ने की सिफारिश

जयपुर: कांग्रेस से निष्कासित वरिष्ठ नेता और शिव विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक अमीन खान की 16 महीने बाद पार्टी में वापसी हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मंगलवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उनके 6 साल के निष्कासन को रद्द करने की घोषणा की।

अमीन खान को 26 अप्रैल 2024 को तत्कालीन लोकसभा उम्मीदवार उम्मेदाराम बेनीवाल का चुनाव में सहयोग न करने के आरोप में पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया गया था। इस बार उनकी पुनः एंट्री भी उम्मेदाराम बेनीवाल की सिफारिश पर हुई है, जिसे पार्टी आलाकमान ने स्वीकार कर लिया।

12th August 2025 – AICC Press Release for Ameen Khan

अमीन खान शिव से पांच बार विधायक रहे

अमीन खान पश्चिमी राजस्थान के अल्पसंख्यक समुदाय के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। वे शिव विधानसभा से 10 बार कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, जिनमें 5 बार जीत दर्ज की है। वर्ष 2008 में अशोक गहलोत सरकार (द्वितीय कार्यकाल) में वे कैबिनेट मंत्री भी रहे।

अमीन खान 2023 विधानसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर

विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे अमीन खान को पार्टी के ही जिला अध्यक्ष की बगावत और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने से नुकसान हुआ। इस चुनाव में निर्दलीय रविंद्र सिंह भाटी विजयी हुए, जबकि अमीन खान तीसरे स्थान पर रहे।

लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने फतेह खान की कांग्रेस में वापसी का विरोध किया था, लेकिन पार्टी आलाकमान ने उनकी आपत्ति को दरकिनार करते हुए फतेह खान को फिर से पार्टी में शामिल कर लिया।

अमीन खान का निष्कासन और विवाद

लोकसभा चुनाव के दौरान अमीन खान पर आरोप लगा कि उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी रविंद्र सिंह भाटी का समर्थन किया। इन आरोपों के चलते पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया। इसके बाद से वे लगातार स्थानीय और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर नाराजगी जताते रहे।

अमीन खान की वापसी की कोशिशें और समर्थकों का दबाव

निष्कासन के बाद भी अमीन खान कांग्रेस में वापसी की कोशिश में लगे रहे। कुछ दिन पहले बाड़मेर में आयोजित कांग्रेस की जनसभा में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मिलने की कोशिश की, हालांकि निर्धारित रूट बदलने के कारण यह मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद उनके समर्थकों ने पार्टी के स्थानीय नेताओं के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

पार्टी के ताज़ा फैसले के बाद अमीन खान के समर्थकों में खुशी की लहर है और इसे पश्चिमी राजस्थान की राजनीति में एक अहम बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

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