रींगस/सीकर, 7 अगस्त 2025: राजस्थान के लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रींगस से प्रसिद्ध तीर्थस्थल खाटू श्याम धाम तक नई रेलवे लाइन के निर्माण को औपचारिक मंजूरी दे दी है। लंबे समय से इस मांग को लेकर क्षेत्रीय जनता और जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रयास किए जा रहे थे, और अब जाकर यह सपना साकार होता दिख रहा है।
खाटू श्याम धाम, जो देशभर के भक्तों का आस्था केंद्र है, विशेषकर फाल्गुन मेले के समय लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ से भर जाता है। अब तक श्रद्धालुओं को रींगस स्टेशन पर उतरकर सड़क मार्ग से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। सड़कें संकरी और अक्सर जाम से भरी होती हैं, जिससे वृद्धजन, महिलाएं और दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को परेशानी होती थी।
अब, इस नई रेलवे लाइन के निर्माण से न केवल समय और ऊर्जा की बचत होगी, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए एक सुविधाजनक, सस्ता और सुरक्षित माध्यम भी उपलब्ध हो सकेगा।
सारांश तालिका
विषय | विवरण |
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मंजूरी | ₹254 करोड़, रेल मंत्री द्वारा स्वीकृति मिली |
दूरी | लगभग 17.5–17.9 किलोमीटर |
भविष्य की योजना | ट्रैक 160 किमी/घंटा, सुरक्षा सिग्नल, फेंसिंग, इलेक्ट्रिफिकेशन योजनाबद्ध |
भूमि अधिग्रहण | 8 अगस्त 2025 से शुरू, लगभग 24.28 हेक्टेयर भूमि |
स्थानीय प्रतिक्रिया | सुरक्षा व धार्मिक माहौल को लेकर विरोधी प्रदर्शन 28 जून 2025 को हुआ |
अन्य सर्वे परियोजनाएं | खाटू–सालासर–सुझांगढ़ जैसे अतिरिक्त रूटों के लिए सर्वे स्वीकृति दी गई |
रेल मंत्री का ऐलान: तीर्थ और विकास, दोनों साथ
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस परियोजना की घोषणा करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम ‘विश्वस्तरीय भारत’ के निर्माण की ओर अग्रसर हैं। खाटू श्याम धाम जैसे स्थानों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ना सिर्फ एक यात्रा सुविधा नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आर्थिक विकास की दिशा है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस परियोजना को 2026 तक प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। बजट, भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी जैसे सभी प्रारंभिक चरणों पर काम तेजी से शुरू हो चुका है।
परियोजना का प्रारूप: क्या होगा रेल मार्ग का खाका?
नई प्रस्तावित रेलवे लाइन रींगस से खाटू श्याम तक बनाई जाएगी जिसकी लंबाई लगभग 17.2-17.9 किलोमीटर होगी। यह सिंगल ब्रॉड गेज ट्रैक होगा, जिसे आगे चलकर डबल लाइन और विद्युतीकरण में परिवर्तित करने की योजना भी है।
संभावित स्टेशनों में निम्न शामिल हो सकते हैं:
- रींगस जंक्शन (मौजूदा स्टेशन)
- खाटू गांव (नया हॉल्ट)
- खाटू श्याम धाम टर्मिनल स्टेशन
इसके अलावा, श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं वाले प्रतीक्षालय, डिजिटल टिकटिंग, पेयजल, शौचालय, लिफ्ट, रैंप और चिकित्सा सहायता केंद्र जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित की गई हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस घोषणा के बाद क्षेत्रीय सांसद, विधायक, पंचायत प्रतिनिधि और समाजसेवी संस्थाओं में खुशी की लहर दौड़ गई है। रींगस से आम लोगों ने कहा, “यह केवल रेलवे लाइन नहीं, यह आस्था और विश्वास की रेखा है। वर्षों से चली आ रही हमारी मांग आज साकार हुई है।”
स्थानीय व्यापार मंडलों और होटल उद्योग से जुड़े लोगों ने भी इसका स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे स्थानीय रोजगार को बल मिलेगा और पर्यटन को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।
श्रद्धालुओं को कैसे होगा लाभ?
हर साल लाखों श्रद्धालु देशभर से खाटू श्याम के दर्शन करने आते हैं। इनमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और बंगाल जैसे राज्यों से आने वाले यात्री शामिल होते हैं। अभी रींगस से खाटू श्याम तक जाने के लिए टैक्सी, बस या निजी वाहन का उपयोग करना पड़ता है, जिसकी लागत ₹500 से ₹1500 तक होती है।
रेल मार्ग बनने से यात्रियों को सीधे ट्रेन से खाटू धाम तक पहुंचने की सुविधा होगी। वरिष्ठ नागरिक, विकलांगजन और छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रहे परिवारों को इससे बहुत राहत मिलेगी।
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
इस रेल परियोजना के बनने से स्थानीय व्यापार, होटल, भोजनालय, फूल विक्रेता, पुजारी, परिवहन सेवाएं आदि सभी को सीधा लाभ मिलेगा। इससे क्षेत्रीय GDP में भी वृद्धि होगी।
इसके साथ ही, सड़क यातायात में कमी आने से प्रदूषण घटेगा, सड़क दुर्घटनाएं कम होंगी और ईंधन की खपत में भी कटौती होगी। रेलवे ने बताया कि इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन प्राथमिकता पर होगा, जिससे यह एक हरित परियोजना (Green Project) भी होगी।
चुनौतियाँ और समाधान
यद्यपि परियोजना को मंजूरी मिल गई है, लेकिन इसे जमीन पर उतारना कई चुनौतियों से भरा होगा। इनमें प्रमुख हैं:
- भूमि अधिग्रहण में किसानों की सहमति
- धार्मिक स्थल के आसपास पर्यावरण संतुलन बनाए रखना
- फंडिंग और निर्माण समयसीमा
इन सभी पहलुओं पर रेलवे बोर्ड, जिला प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधि मिलकर काम करेंगे। रेलवे ने विश्वास जताया है कि किसानों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और आवश्यक सुविधाएं समय पर प्रदान की जाएंगी।
भविष्य की योजनाएं: खाटू को जोड़ने वाले अन्य रूट
इस परियोजना की सफलता के बाद रेलवे अन्य संभावित मार्गों पर भी विचार कर रहा है, जैसे:
- जयपुर – खाटू श्याम सीधी लिंक
- अजमेर – रींगस – खाटू एक्सप्रेस
- दिल्ली – खाटू स्पेशल साप्ताहिक ट्रेन
इन योजनाओं से खाटू धाम की पहुंच और अधिक सुगम हो जाएगी और अंतरराज्यीय श्रद्धालुओं को अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।
विश्वास और विकास की पटरी पर
रींगस से खाटू श्याम तक प्रस्तावित रेलवे लाइन केवल एक निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास, सरकार की दूरदर्शिता और आधुनिक भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
श्रद्धालुओं के लिए यह एक वरदान है, जबकि स्थानीय जनता के लिए यह आर्थिक समृद्धि का रास्ता खोलने वाली योजना है। जब यह रेल लाइन पूर्ण रूप से चालू होगी, तो यह न केवल दूरी कम करेगी, बल्कि दिलों को भी जोड़ेगी।